📜 परिचय
🏹 राठौड़ों की उत्पत्ति
• पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार बदायूँ से आकर राव सीहा ने राठौड़ वंश की स्थापना की।
• राठौड़ स्वयं को सूर्यवंशी मानते हैं।
• राठौड़ शब्द संस्कृत के राष्ट्रकूट से बना है, जो दक्षिण भारत की एक जाति थी।
• कर्नल जेम्स टॉड ने कहा – “मुगल बादशाह अपनी विजयों में से आधी के लिए राठौड़ों की 1 लाख तलवारों के अहसानमंद थे।”
👑 राव सीहा
• पाली के पालीवाल ब्राह्मणों की रक्षा के लिए मारवाड़ आये क्योंकि मेर पालीवालों से लूटपाट करते थे।
• राव सीहा + पालीवाल ब्राह्मण व मुस्लिम आक्रमणकारियों के बीच लड़े गये युद्ध में 1 लाख लोग मारे गए – लाख झंवर कहलाता है।
• राव सीहा का स्मारक – बीठू (पाली)
👑 राव आस्थान
राव सीहा के पुत्र। खेड़ (बालोतरा) पर अधिकार कर रणछोड़राय मंदिर का निर्माण कराया। जलालुद्दीन खिलजी की सेना से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
👑 राव धूहड़
कर्नाटक से अपनी कुलदेवी चक्रेश्वरी (नागणेची माता) की मूर्ति लाकर रणगण गाँव (बालोतरा) में स्थापित करवाई।
👑 मल्लीनाथ जी
बाड़मेर के मालाणी क्षेत्र का नाम इन्हीं के नाम पर पड़ा। राजस्थान के लोक देवता हैं, मंदिर तिलवाड़ा (बालोतरा) में है।
👑 राव चूड़ा
• प्रतिहार वंश की इंदा शाखा ने अपनी राजकुमारी की शादी राव चूड़ा के साथ कर दी तथा मंडोर दहेज में दे दिया।
• राव चूड़ा ने अपनी राजधानी मंडोर (जोधपुर) को बनाया। (मंडोर का प्राचीन नाम – माण्डव्यपुर)
• मारवाड़ के राठौड़ वंश का वास्तविक संस्थापक।
• मारवाड़ में सामन्तशाही / नौकरशाही की शुरुआत की।
• राव चूड़ा ने छोटे बेटे राव कान्हा को राजा बना दिया।
• बड़े पुत्र राव रणमल ने अपनी बहन हंसाबाई का विवाह राणा लाखा के साथ इस शर्त पर किया कि इनसे उत्पन्न पुत्र ही मेवाड़ का शासक बनेगा। महाराणा कुम्भा ने रणमल की प्रेमिका भारमली की सहायता से रणमल की हत्या करवा दी।
👑 राव जोधा (1438–1489 ई.)
• आवल बावल की संधि – 1453 ई. – हंसाबाई की मध्यस्थता से मेवाड़ (महाराणा कुम्भा) व मारवाड़ की सीमा का निर्धारण सोजत (पाली) में किया गया।
• पुत्री श्रृंगार देवी का विवाह महाराणा कुम्भा के पुत्र रायमल से किया।
• 13 मई 1459 – मेहरानगढ़ दुर्ग (नींव करणी माता ने रखी) बनाकर जोधपुर शहर बसाया।
• दूसरे पुत्र राव बीका ने बीकानेर बसाया।
• पुत्र राव दूदा ने मेड़ता बसाया।
• रानी जसमादे – रणीसर तालाब; माता कोड़मदे के नाम पर कोड़मदेसर तालाब।
• दिल्ली शासक बहलोल लोदी को हराया।
• पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार राव जोधा मारवाड़ का प्रथम प्रतापी राजा था।
👑 राव सातलदेव
अजमेर के सूबेदार मल्लू खाँ के सेनापति घुड़ले खाँ ने गणगौर की पूजा कर रही 140 कन्याओं का अपहरण कर लिया। राव सातलदेव ने घुड़ले खाँ का सिर काटकर तीरों से छिद्रित कर कन्याओं को दे दिया।
👑 राव गांगा राठौड़
- खानवा के युद्ध (1527 ई.) – पुत्र मालदेव के नेतृत्व में 4000 की सेना भेजकर राणा सांगा की मदद की।
- जोधपुर में गांगाणाल तालाब, गांगा की बावड़ी बनवाई।
- राव मालदेव (मारवाड़ का पितृहंता) ने इनकी हत्या कर दी।
👑 राव मालदेव (1532–1562 ई.)
राज्याभिषेक: सोजत (पाली)
उपनाम: 52 युद्ध, 58 परगनों का विजेता
• अबुल फजल, निजामुद्दीन, बदायूँनी – हशमत वाला शासक
• फरिश्ता – हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली शासक
• बदायूँनी – भारत का महान पुरुषार्थी राजकुमार
• हीरावाड़ी (नागौर) का युद्ध – 1533 ई. – नागौर के शासक दौलत खाँ को हराकर नागौर पर अधिकार किया।
• पाहेबा / साहेबा का युद्ध – 1541 ई. – राव मालदेव V/S राव जैतसी (बीकानेर) – जैतसी मारा गया।
⚔️ गिरी सुमेल युद्ध (जैतारण युद्ध – पाली) – 5 जनवरी 1544
• शेरशाह सूरी की कूटनीति के कारण मालदेव वापस जोधपुर चला गया।
• जेता व कूँपा ने शेरशाह सूरी की सेना का सामना किया और वीरगति को प्राप्त हुए।
• शेरशाह सूरी का सेनापति जलाल खाँ जलवानी कुछ सेना लेकर आया और शेरशाह सूरी युद्ध जीत गया।
• शेरशाह सूरी ने कहा – “मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता।”
• तारीख-ए-शेरशाही (अब्बास खाँ सरवानी) में इस युद्ध का वर्णन है।
• शेरशाह सूरी ने जोधपुर दुर्ग पर अधिकार कर शेरशाही मस्जिद का निर्माण करवाया।
• 1545 में शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद मालदेव ने पुनः जोधपुर दुर्ग पर अधिकार कर लिया।
• हरमाड़ का युद्ध – 1557 ई. – मालदेव + अजमेर सूबेदार हाजी खाँ V/S महाराणा उदयसिंह – मालदेव विजयी।
📌 अन्य तथ्य
- रूठी रानी – उमादे (जैसलमेर शासक लूणकरण भाटी की पुत्री) शादी के दिन नाराज होकर अजमेर के तारागढ़ दुर्ग में चली गई।
- झाली रानी स्वरूपदे ने मंडोर के पास “बहुओं रो तालाब” का निर्माण करवाया।
📚 दरबारी विद्वान – ग्रंथ
- आशानंद जी – बाघा भारमली रा दुहा
- ईसरदास जी – हाला झाला री कुंडलिया (सूर सतसई)
👑 राव चंद्रसेन (1562–1581 ई.)
उपनाम: मारवाड़ का प्रताप (विश्वेश्वर नाथ रेऊ), प्रताप का अग्रगामी / पथ-प्रदर्शक, भूला बिसरा राजा
• लोहावट का युद्ध – 1563 – भाई उदयसिंह को हराया।
• 1564 – बड़ा भाई राम अकबर के दरबार में गया, अकबर ने हुसैन कुली खाँ को मेहरानगढ़ दुर्ग पर अधिकार करने भेजा।
• राव चंद्रसेन भाद्राजूण (जालौर) चला गया।
• नागौर दरबार – 1570 ई. – अकबर ने नागौर में शुक्र तालाब बनवाया। राव चंद्रसेन नागौर दरबार में गये लेकिन वापस आ गये।
• 1581 – सचियाय (पाली) में मृत्यु। स्मारक – सचियाय (पाली)।
• 1581–1583 – मारवाड़ खालसा (मुगलों के अधीन) घोषित।
👑 मोटा राजा उदयसिंह (1583–1595)
• मारवाड़ का प्रथम शासक जिसने मुगलों की अधीनता स्वीकार की।
• बेटी जगत गोसाईं (जोधा बाई) की शादी सलीम (जहाँगीर) से – खुर्रम (शाहजहाँ) का जन्म।
• 1589 – सिवाणा पर आक्रमण (दूसरा साका) – कल्ला रायमलोत ने केसरिया किया, हाड़ी रानी ज्ञान कँवर ने जौहर किया।
👑 सवाई सूरसिंह
उपाधि: सवाई (अकबर ने दी) – मारवाड़ के एकमात्र शासक जिन्हें सवाई की उपाधि मिली। अकबर व जहाँगीर की सेवा की।
👑 महाराजा गजसिंह
उपाधि: दलथम्भन (फौज रोकने वाला) – जहाँगीर ने दी। प्रेमिका अनारा बेगम के कहने पर छोटे बेटे जसवंत सिंह को शासक बनाया, बड़े बेटे अमरसिंह को नागौर का शासक बनाया।
👑 राव अमरसिंह राठौड़
• मतीरे की राड़ – 1644 ई. – बीकानेर के कर्णसिंह V/S नागौर के अमरसिंह – बीकानेर की विजय।
• बहादुरी, आत्मसम्मान और बलिदान के प्रतीक।
👑 महाराजा जसवंत सिंह प्रथम (1638–1678 ई.)
प्रधानमंत्री / संरक्षक: राजसिंह कूँपावत
• धरमत (1658) – दारा शिकोह का साथ दिया, हारे।
• सामूगढ़ (1658) – औरंगजेब बादशाह बने, अधीनता स्वीकारी।
• खजुआ (1659) – औरंगजेब V/S शाहशुजा – औरंगजेब विजयी (सेनापति – जसवंत सिंह)।
• जमरूद (काबुल) में मृत्यु। औरंगजेब ने कहा – “आज कुफ्र (धर्म विरोधी) का दरवाजा टूट गया है।”
📚 पुस्तकें
- भाषा भूषण
- आनंद विलास
- चन्द्रप्रबोध नाटक
- सिद्धांत सार
- सिद्धांत बोध
- अनुभव प्रकाश
- अपरोक्ष सिद्धांत
🏛️ स्थापत्य
- काबुल से अनार के पौधे – कागा के बाग (जोधपुर)
- रानी अतिरंगेदे – जान सागर तालाब (शेखावत जी रो तालाब)
- रानी जसवंतदे – राई का बाग, कल्याण सागर तालाब
⚔️ वीर दुर्गादास राठौड़
उपनाम: राठौड़ों का यूलिसिस (कर्नल जेम्स टॉड), मारवाड़ का उद्धारक, मारवाड़ का उपणीदिया मोती
• छतरी: शिप्रा नदी किनारे (उज्जैन – मध्य प्रदेश)
• 1678–1708 – 30 वर्ष अजीत सिंह को शासक बनाने के लिए संघर्ष।
• औरंगजेब के पुत्र अकबर द्वितीय को मराठा सरदार शम्भाजी के दरबार में पहुँचाया।
👑 महाराजा अजीत सिंह
• मुकुंददास खींची, गौरा धाय के साथ दुर्गादास राठौड़ ने अजीत सिंह को औरंगजेब के चंगुल से निकालकर सिरोही के कालंद्री मंदिर में छुपाया।
• गौराधाय – मारवाड़ की पन्नाधाय।
• देबारी समझौते के तहत अजीत सिंह शासक बने – दुर्गादास को राज्य से निकाल दिया।
• पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा – अजीत सिंह को “कान का कच्चा” कहा।
• पुत्री इंद्रकँवरी का विवाह मुगल बादशाह फर्रुखसियर से – राजपूताने की अंतिम राजकुमारी जिसने मुगलों से शादी की।
• बड़े बेटे अभयसिंह के कहने पर छोटे पुत्र बख्तसिंह ने अजीत सिंह की हत्या कर दी।
📚 पुस्तकें
- गुण सागर
- दुर्गापाठ भाषा
- निर्वाण दुहा
- अजीत चरित्र
- गज उद्धार (भागवत कथा)
👑 महाराजा अभयसिंह
खेजड़ली घटना – 12 सितम्बर 1730 – भाद्रपद शुक्ल दशमी को खेजड़ी काटने के आदेश पर अमृता देवी विश्नोई ने 3 पुत्रियों सहित 363 लोगों ने पेड़ों से चिपककर जान दे दी।
👑 महाराजा विजयसिंह
मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय से अनुमति प्राप्त कर विजयशाही सिक्के चलाये। गुलाबराय (पासवान) का अत्यधिक प्रभाव – श्यामलदास ने विजयसिंह को जहाँगीर का नमूना व गुलाबराय को मारवाड़ की नूरजहाँ कहा।
👑 भीमसिंह
कृष्णा कुमारी की प्रथम सगाई इन्हीं के साथ हुई।
👑 महाराजा मानसिंह (1803–1843 ई.)
• उपनाम – सन्यासी राजा
• मेहरानगढ़ दुर्ग में मानप्रकाश पुस्तकालय की स्थापना।
• 1818 – ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि।
• दरबारी विद्वान बांकीदास – बांकीदास री ख्यात, आयो अंग्रेज मुल्क रे ऊपर (गीत)
👑 महाराजा तख्त सिंह
- 1857 की क्रांति के समय शासक।
- कन्या वध रोकने के लिए कठोर आदेश – पत्थरों पर खुदवाकर किलों पर लगवाए।
- अजमेर मेयो कॉलेज – 1 लाख रुपये दिये।
👑 महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय
• 1883 – महर्षि दयानंद सरस्वती जी जोधपुर आये, प्रेमिका नन्हीं जान ने जहर दे दिया। 30 अक्टूबर 1883 – अजमेर में मृत्यु।
• इनके समय आर्य समाज की स्थापना।
• दरबारी कवि मुरारीदान – यशवंत यशोभूषण ग्रंथ।
👑 महाराजा सरदार सिंह
- पिता की याद में जसवंत थड़ा – राजस्थान का ताजमहल।
- बॉक्सर युद्ध – मारवाड़ की सेना चीन भेजी – झंडे पर “चीन 1900” लिखने का सम्मान।
- पोलो खेलने के शौक – जोधपुर को पोलो का घर कहा जाता है।
👑 महाराजा सुमेरसिंह
प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) – सेना लेकर फ्रांस गये।
👑 महाराजा उम्मेदसिंह
- उम्मेद भवन पैलेस / छीतर पैलेस का निर्माण।
- जवाई बाँध का निर्माण।
👑 महाराजा हनुवंतसिंह
मारवाड़ के अंतिम शासक।
🏰 किशनगढ़ के राठौड़
• महाराजा रूपसिंह – सामूगढ़ युद्ध में दाराशिकोह की ओर से वीरगति, रूपनगढ़ दुर्ग बनवाया।
• महाराजा मानसिंह – बहन चारुमति का विवाह औरंगजेब से तय था, लेकिन मेवाड़ महाराणा राजसिंह ने विवाह किया।
• महाराजा सावंत सिंह (1748–1764) – राजपाट त्याग कर वृन्दावन चले गये, नाम नागरीदास रखा (वल्लभ सम्प्रदाय)। प्रेयसी बणी ठणी (विष्णुप्रिया) का प्रसिद्ध चित्र मोरध्वज निहालचंद ने बनाया। ग्रंथ – मनोरथ मंजरी, रसिक रत्नावली, दोहा दशा।
🏰 बीकानेर का इतिहास
👑 राव बीका (1465–1504 ई.)
• करणी माता के आशीर्वाद से 1488 में बीकानेर नगर बसाया (अक्षय तृतीया – पतंग महोत्सव)।
• देशनोक में करणी माता का मंदिर बनवाया।
• जोधपुर के शासक राव सूजा पर आक्रमण – राजकीय चिह्न छीनकर बीकानेर लाये।
👑 राव लूणकरण (1505–1526 ई.)
• कर्मचन्द्र वंशकीर्ति काव्यम् (जयसोम) – कर्ण से तुलना
• लूणकरणसर शहर व झील का निर्माण।
• नागौर के शासक मुहम्मद खाँ को हराया।
• 1526 – ढोसी के युद्ध में नारनौल के नवाब अबीमीरा से लड़ते हुए वीरगति।
👑 राव जैतसी (1526–1541 ई.)
- खानवा युद्ध में पुत्र कल्याणमल को भेजा।
- दरबारी कवि – विदू सूजा (राव जैतसी रो छंद)।
- 1534 – भटनेर दुर्ग पर दुबारा अधिकार (बाबर के पुत्र कामरान से छीना)।
- पाहेबा / साहेबा युद्ध में राव मालदेव के साथ वीरगति।
👑 राव कल्याणमल (1541–1574 ई.)
• गिरी सुमेल युद्ध में शेरशाह सूरी की सहायता → बीकानेर का शासक बने।
• नागौर दरबार (1570) – अकबर की अधीनता स्वीकारी। पुत्री का विवाह अकबर से।
• बीकानेर का प्रथम शासक जिसने मुगलों की अधीनता स्वीकारी।
👑 महाराजा रायसिंह (1574–1612 ई.)
• 1572 – जोधपुर दुर्ग सौंपा गया।
• 1574 – महाराजाधिराज की उपाधि के साथ बीकानेर शासक।
• 1589–1594 – जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण (मंत्री कर्मचन्द्र)।
• मुंशी देवीप्रसाद – राजपूताना का कर्ण।
• 1612 – बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) में मृत्यु।
📚 पुस्तकें
- रायसिंह महोत्सव (संस्कृत)
- वैद्यक वंशावली
- बाल बोधिनी
- ज्योतिष रत्नमाला / रत्नाकर
👑 दलपत सिंह
रायसिंह के बड़े पुत्र – जहाँगीर का विरोध → भटनेर किले में कैद → मृत्यु।
👑 महाराजा सूरसिंह
बीकानेर में सूरसागर झील तथा सूरमहल का निर्माण।
👑 महाराजा कर्णसिंह (1631–1669 ई.)
- शाहजहाँ + औरंगजेब की सेवा।
- चिंतामणि भट्ट (शुक सप्तति) – जांगलधर बादशाह कहा।
- रचना – साहित्य कल्पद्रुम।
- दरबारी विद्वान गंगानंद मैथिली – कर्णभूषण, काव्य डाकिनी।
👑 महाराजा अनूपसिंह (1669–1698 ई.)
• जूनागढ़ दुर्ग में 33 करोड़ देवी-देवताओं के मंदिर (मूर्तियाँ दक्षिण भारत से)।
• बीकानेर चित्रशैली का स्वर्णकाल।
• दरबारी कवि भावभट्ट – अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर, संगीत अनुपांकुश, भाव मंजरी।
• चुंचेर (अनूपगढ़) की स्थापना।
• जूनागढ़ दुर्ग में अनूप महल व अनूप संस्कृत पुस्तकालय।
📚 रचनाएँ
- अनूप विवेक
- काम प्रबोध
- श्राद्ध प्रयोग
- चिंतामणि
- अनूपोदय
👑 सूरतसिंह
- 1805 – भटनेर दुर्ग पर आक्रमण → नाम हनुमानगढ़ किया।
- 1814 – चूरू पर आक्रमण – ठाकुर शिवजी सिंह ने चाँदी के गोले चलवाये।
- 1818 – ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि।
👑 रतनसिंह
- दरबारी कवि दयालदास – दयालदास री ख्यात / बीकानेर रा राठौड़ा री ख्यात (राजस्थान की अंतिम ख्यात)।
- सीकर क्रांतिकारी जवाहर जी को शरण दी।
👑 अन्य बीकानेर शासक
- सरदार सिंह – 1857 की क्रांति।
- महाराजा डूंगरसिंह – बीकानेरी भुजिया का चलन।
👑 महाराजा गंगासिंह (1887–1943 ई.)
• छप्पनिया अकाल (1899) – कैसर-ए-हिन्द की उपाधि।
• 1913 – प्रजा प्रतिनिधि सभा की स्थापना – राजस्थान में विधानमंडल की दिशा में पहला कदम।
• बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय – सर्वाधिक आर्थिक सहायता।
• प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय (फ्रांस) शांति सम्मेलन में भाग लिया।
• नरेंद्र मंडल / चैंबर ऑफ प्रिंसेज (1921) – प्रथम चांसलर / अध्यक्ष (1921–1925)।
• रोम नोट – स्वशासन की मांग के लिए रोम में अंग्रेजों को पत्र।
• 1927 – गंग नहर – रामनगर → गंगानगर।
• आधुनिक भारत का भागीरथ कहा जाता है।
• तीनों गोलमेज सम्मेलन (लंदन) 1930, 1931, 1932 में भाग लिया।
🏛️ निर्माण
- लालगढ़ पैलेस (पिता लालसिंह की स्मृति) – वास्तुकार स्टीवेन जैकब।
- देशनोक में करणी माता मंदिर का आधुनिक स्वरूप।
- रामदेवरा मंदिर का निर्माण।
- गोगामेड़ी मंदिर (हनुमानगढ़) का आधुनिक स्वरूप।
👑 महाराजा सादुल सिंह
बीकानेर के अंतिम शासक।