राजस्थान के शौर्य का स्वर्णिम काल: चौहान, प्रतिहार, परमार, सोलंकी – पूरा ऐतिहासिक विवरण, उत्पत्ति के मत, प्रमुख शासक, और राजपूत गौरव।
📜 7वीं–12वीं शताब्दी : राजपूत युग
7वीं से 12वीं शताब्दी का काल राजपूत युग कहलाता है। इस काल में अनेक राजपूत वंशों का उदय हुआ — चौहान, प्रतिहार, परमार, सोलंकी आदि।
🏹 चौहान वंश की उत्पत्ति के प्रमुख मत
ग्रंथ: पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई)। वशिष्ठ ऋषि ने अग्निकुंड से 4 योद्धा: गुर्जर-प्रतिहार, परमार, चालुक्य (सोलंकी), चौहान। समर्थन: मुहणौत नैणसी, सूर्यमल्ल मिश्रण।
ग्रंथ: पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महाकाव्य, हम्मीर रासो। समर्थक: गौरीशंकर हीराचंद ओझा।
प्रमाण: हाँसी अभिलेख, अचलेश्वर मंदिर लेख।
स्रोत: रायपाल का सेवाड़ी (पाली) अभिलेख।
शक/सिथियन: जेम्स टॉड, क्रुक ; हूण: वी.ए. स्मिथ ; कुषाण (यू-ची): अलेक्जेंडर कनिंघम।
समर्थक: सी.वी. वैद्य, गौरीशंकर ओझा।
समर्थक: गोपीनाथ शर्मा, दशरथ शर्मा, डी.आर. भंडारकर। प्रमाण: बिजौलिया शिलालेख (वत्स गोत्र ब्राह्मण)।
📍 अजमेर/शाकंभरी के चौहान वंश – मूल स्थान व राजधानी
उपनाम: शाकम्भरी के चौहान
प्रारंभिक राजधानियाँ: अहिच्छत्रपुर (नागौर) → सांभर → अजमेर
👑 प्रमुख शासक (क्रमानुसार)
- वासुदेव (c. 551 ई.) – संस्थापक / मूल पुरुष। बिजौलिया अभिलेख: वत्स गोत्र ब्राह्मण। राजधानी अहिच्छत्रपुर। सांभर झील निर्माण (परंपरागत उल्लेख)।
- गुवक प्रथम – नागभट्ट द्वितीय (प्रतिहार) का सामंत, बाद में स्वतंत्र। निर्माण: हर्षनाथ मंदिर, इष्टदेव: हर्षनाथ।
- चंदनराज – पत्नी रुद्राणी, पुष्कर में 1000 दीपक जलाकर पूजा।
- सिंहराज – उपाधि: महाराजाधिराज।
- विग्रहराज द्वितीय – चालुक्य मूलराज प्रथम को हराया। आशापुरा माता मंदिर (भड़ौच, गुजरात)।
- गोविंदराज तृतीय – उपाधि: वैरीघट्ट (शत्रु संहारक)। गजनवी आक्रमण रोका।
- पृथ्वीराज प्रथम – पुष्कर की रक्षा, 700 चालुक्यों का वध (ग्रंथ उल्लेख)।
- अजयराज (1105–1133 ई.) – 1113 ई. में अजमेर की स्थापना, राजधानी स्थानांतरण। चाँदी के सिक्के (अजयदेव), रानी सोमलदेवी का नाम सिक्कों पर।
- अर्णोराज (1133–1155 ई.) – तुर्कों को हराया, नरवर्मन (मालवा) पर विजय। 1137 ई. में आनासागर झील निर्माण, वराह मंदिर (पुष्कर)। उपाधि: परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर। पराजय कुमारपाल (चालुक्य) के हाथों, हत्या पुत्र जगदेव द्वारा।
- विग्रहराज चतुर्थ (बिसलदेव) (1158–1163 ई.) – दिल्ली विजय (प्रथम चौहान), स्वर्णकाल। रचनाएँ: ललित विग्रहराज, बिसलदेव रासो, संस्कृत नाटक हरकेली। संस्कृत पाठशाला (बाद में मस्जिद) = अढ़ाई दिन का झोपड़ा। उपाधि: कवि बान्धव।
- पृथ्वीराज द्वितीय – रानी सुहवदेवी, मेनाल मंदिर निर्माण।
- महत्वपूर्ण बिन्दू -
- मुहम्मद गौरी भारत में मुस्लिम सम्राज्य का संस्थापक बना
- पृथ्वीराज चौहान को अंतिम हिन्दू सम्राट कहा जाता है|
- पृथ्वीराज चौहान ने चारो ओर दुश्मनो का खात्मा कर दलपंगूल (विश्वविजेता) की उपाधि धारण की, इनकी अन्य उपाधि रायपिथौरा भी है
- पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चन्दबरदाई, जयानक, विद्यापति गौड, वागीश्वर जनार्दन, आशाधर, विश्वरूप थे
- पृथ्वीराज रासो ग्रंथ (पिंगल भाषा में) चंदबरदाई ने लिखा, इस ग्रंथ को चंदबरदाई के पुत्र जल्हण ने पूरा किया
- नोट – चन्दबरदाई का मूल नाम – पृथ्वी भट्ट वल्लादी था
- पृथ्वीराज विजय ग्रंथ (संस्कृत भाषा में)- जयानक ने लिखा
- पृथ्वीराज चौहान के घोड़े का नाम नाट्यरम्भा था
- पृथ्वीराज की छतरी - काबुल (अफगानिस्तान)
- पृथ्वीराज का स्मारक – तारागढ़ (अजमेर)
👑 पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177–1192 ई.)
⚔️ महोबा विजय (1182) – चंदेल शासक परमार्दिदेव, आल्हा-उदल पराजित।
🤝 चालुक्य संघर्ष – भीमदेव द्वितीय, नागौर युद्ध → संधि।
💍 संयोगिता विवाह – कन्नौज के जयचंद की पुत्री।
⚔️ तराइन के युद्ध: प्रथम (1191) – विजेता पृथ्वीराज, गौरी पराजित; द्वितीय (1192) – विजेता मुहम्मद गौरी, भारत में मुस्लिम शासन की शुरुआत।
🏹 रासो कथा: गौरी गजनी ले गया, शब्दभेदी बाण से वध।
📚 साहित्य: चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो), जयानक (पृथ्वीराज विजय), विद्यापति, जनार्दन, आशाधर।
📌 उपाधि: रायपिथौरा, अंतिम हिन्दू सम्राट (पारंपरिक), घोड़ा: नाट्यरंभा, स्मारक: तारागढ़ (अजमेर)।
रणथम्भौर दुर्ग का गौरवशाली इतिहास — गोविंदराज से हम्मीर देव तक, खिलजी आक्रमण, अमीर खुसरो के विवरण और अमर शहीदी परंपरा।
🏰 रणथम्भौर के चौहान की स्थापना
पिता: पृथ्वीराज चौहान । 1192 (तराइन युद्ध) के बाद दिल्ली पर मुस्लिम सत्ता स्थापित।
कुतुबुद्दीन ऐबक ने रणथम्भौर की जागीर दी → रणथम्भौर शाखा के संस्थापक।
👑 प्रारंभिक शासक (क्रमबद्ध)
इल्तुतमिश से युद्ध, वीरगति।
रज़िया सुल्तान के आक्रमण को विफल किया।
नासिरुद्दीन महमूद के आक्रमण को रोका।
⭐ हम्मीर देव चौहान (1282–1301 ई.)
रणथम्भौर के सबसे शक्तिशाली शासक और चौहान वंश का अंतिम महान सम्राट।
- कोटियजन यज्ञ का आयोजन (पंडित विश्वरूप की देखरेख में)
- मेवाड़ के शासक समरसिंह को हराया
- 17 युद्ध लड़े → 16 में विजय
⚔️ जलालुद्दीन खिलजी के आक्रमण
1290 ई. में झांई (झाई) दुर्ग पर अधिकार। 1291–92 में रणथम्भौर पर 2 बार आक्रमण → असफल। जलालुद्दीन का कथन: “ऐसे 10 दुर्ग मुसलमान के एक बाल के बराबर नहीं”।
📚 स्रोत: अमीर खुसरो – मिफ्ता-उल-फुतूह ; जियाउद्दीन बरनी – तारीख-ए-फिरोजशाही।
⚔️ अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण (अंतिम संघर्ष)
⚔️ प्रारंभिक युद्ध: अलाउद्दीन ने उलुग खान व नुसरत खान भेजे, झांई दुर्ग पर अधिकार, हम्मीर की सेना ने नुसरत खान को मार डाला।
🛡️ अंतिम घेरा (1301): अलाउद्दीन स्वयं आया; साथ में अमीर खुसरो। लगभग 1 वर्ष घेरा; दुर्ग में अकाल। “सोने के बदले भी चावल नहीं मिल रहा था” – अमीर खुसरो।
⚠️ विश्वासघात: सेनापति रणमल व रतिपाल अलाउद्दीन से मिल गए।
🔥 साका और जौहर (1301 ई.) – प्रथम साका & जल-जौहर
🔥 जौहर: रानी रंगदेवी, पुत्री देवलदे – पद्मला तालाब में कूदकर (एकमात्र जल-जौहर, तालाब में)।
हम्मीर देव ने केसरिया धारण किया, युद्ध करते हुए वीरगति। मीर मुहम्मद शाह भी हम्मीर के साथ लड़ते हुए मारा गया।
🏰 विजय के बाद: अमीर खुसरो – “आज काफिरों का घर इस्लाम का घर हो गया”; दुर्ग उलुग खान को सौंपा गया।
🏛️ स्थापत्य एवं प्रसिद्ध उक्ति
32 खंभों की छतरी (न्याय छतरी) – जैत्रसिंह के 32 वर्ष शासन की स्मृति में। प्रसिद्ध उक्ति:
“सिंह सवन सत्पुरुष वचन, कदली फलै एक बार / तिरिया तेल हम्मीर हठ, चढ़ै ना दूजी बार”
📚 हम्मीर पर प्रमुख ग्रंथ (साहित्य)
नयनचन्द्र सूरी
शारंगधर / जोधराज
चंद्रशेखर
चंद्रशेखर
अमृत कैलाश
भांडऊ व्यास
शाकम्भरी के चौहानों के बाद नाडोल, जालौर, सिरोही, बूंदी, कोटा और झालावाड़ — राजपूत गौरव की अमर गाथाएँ।
🏹 नाडोल के चौहान
⭐ प्रमुख तथ्य: कीर्तिपाल चौहान ने मेवाड़ के शासक सामंतसिंह को पराजित किया। बाद में नाडोल शाखा → जालौर शाखा में विलीन।
🏰 जालौर के चौहान (सोनगरा चौहान)
कीर्तिपाल चौहान (c. 1181 ई.) — जालौर परमारों से छीना।
जाबालिपुर
सुवर्णगिरि
सोनगढ़ पर्वत → सोनगरा चौहान
👑 प्रमुख शासक
- चाचिगदेव: समकालीन नासिरुद्दीन महमूद, बलबन — इनके समय कोई बड़ा आक्रमण नहीं।
👑 कान्हड़देव चौहान (1305–1311 ई.)
⚔️ गुजरात अभियान प्रसंग: अलाउद्दीन खिलजी ने रास्ता माँगा, मुख्यमंत्री जैता देवड़ा ने सेना पर हमला किया।
💞 प्रेम कथा (लोक परंपरा): फिरोजा (खिलजी की पुत्री) व वीरमदेव (कान्हड़देव का पुत्र) — विवाह प्रस्ताव अस्वीकार।
सेनापति: कमालुद्दीन गुर्ग । सिवाणा सेनापति: सातलदेव (कान्हड़देव का भतीजा)। विश्वासघात: भावला पंवार ने पानी अपवित्र किया। परिणाम: राजपूतों ने केसरिया किया, महिलाओं ने जौहर। विजय के बाद सिवाणा → खैराबाद, किला कमालुद्दीन गुर्ग को।
विश्वासघात: सेनापति दहिया बीका ने रास्ता बताया। परिणाम: कान्हड़देव व वीरमदेव वीरगति, रानी जेतलदेव के नेतृत्व में जौहर। विजय के बाद जालौर → जलालाबाद। स्रोत: वीरमदेव सोनगरा री बात, हम्मीरायण।
⭐ विशेष तथ्य: कान्हड़देव का भाई मालदेव — खिलजी की अधीनता स्वीकार, चित्तौड़ का प्रशासन मिला।
🏔️ सिरोही के चौहान (देवड़ा शाखा)
अबूर्द प्रदेश, सरणवाही, जेम्स टॉड → शिवपुरी
लुम्बा चौहान (c. 1311 ई.) — परमारों से आबू व चंद्रावती छीनी।
सारणेश्वर महादेव
- अखैराज देवड़ा (उपनाम: उड़ना अखैराज): खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा का साथ।
- सुरतान देवड़ा: देत्ताणी युद्ध (1583) में जगमाल (अकबर पक्ष) को हराया।
🏰 बूंदी के चौहान (हाड़ा शाखा)
📍 प्राचीन नाम: वृंदावती । 🔰 स्थापना: देवीसिंह हाड़ा (जैता मीणा को हराकर)।
अकबर से संधि (1569), उपाधि: राव राजा, मनसब: 5000
जहाँगीर द्वारा सम्मानित, उपाधि: रामराज
केशवराय मंदिर (केशोरायपाटन), रंगमहल (बूंदी किला)
84 खंभों की छतरी (देवपुरा), रानी जी की बावड़ी (नाथावती)
नेहतरंग ग्रंथ, फर्रुखसियर ने नाम रखा → फर्रुखाबाद
🏰 कोटा के चौहान
📍 नाम: कोटिया भील से, पुराना नाम: नंदग्राम । 🔰 स्थापना: माधोसिंह (1631), पिता: रतनसिंह (बूंदी), शाहजहाँ ने कोटा दिया।