मेजर शर्यफ भोंसले :- भारतीय सेना के इतिहास में कुछ मामले ऐसे रहे हैं, जो समय के साथ रहस्य बन जाते हैं। मेजर शर्यफ भोंसले का नाम भी उन्हीं में शामिल है। वे एक विशेष बल अधिकारी थे, जो 2014 में विदेश यात्रा के दौरान लापता हो गए और बाद में उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया। अब 10 साल बाद, 2026 में सेना ने उनकी कमीशन सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शुरुआती जीवन और सैन्य करियर (मेजर शर्यफ भोंसले)
मेजर भोंसले महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले थे। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्रशिक्षण लिया और बाद में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 2 पैरा (स्पेशल फोर्सेस) यूनिट में कमीशन प्राप्त किया। यह यूनिट पैराशूट रेजिमेंट का हिस्सा है और इसे काउंटर टेरर ऑपरेशन, एयरबोर्न मिशन और हाई-रिस्क ऑपरेशन के लिए जाना जाता है।
उनका रिकॉर्ड साफ माना जाता था और सेवा के दौरान उनके खिलाफ कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई दर्ज नहीं थी।
अरुणाचल प्रदेश में एडीसी की जिम्मेदारी(मेजर शर्यफ भोंसले)
मेजर भोंसले को एक समय अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) निर्भय शर्मा के एडीसी (Aide-de-Camp) के रूप में तैनात किया गया था। यह पद सम्मानजनक माना जाता है, जिसमें प्रोटोकॉल, सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी होती है।
यह पोस्टिंग उन्हें नियमित फील्ड ड्यूटी से अलग एक सिविल डिप्यूटेशन के तहत मिली थी।
2014: छुट्टी, विदेश यात्रा और रहस्यमय गुमशुदगी (मेजर शर्यफ भोंसले)
23 जून 2014 को मेजर भोंसले ने स्वीकृत अवकाश लिया, जो 18 अगस्त तक निर्धारित था। लेकिन इस दौरान उन्होंने यूरोप की यात्रा की योजना बनाई।
- 1 जुलाई: पेरिस पहुंचे
- स्पेन: अंतरराष्ट्रीय पैराशूटिंग फेस्टिवल में भाग लिया
- नॉर्वे: बेस जंपिंग गतिविधियों में हिस्सा लिया
बताया जाता है कि वे नॉर्वे के लिसेबोटन और केजराग क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स कर रहे थे। इसी दौरान उनका संपर्क अचानक टूट गया।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने विदेश यात्रा के लिए सैन्य खुफिया निदेशालय से अनिवार्य अनुमति नहीं ली थी, जो नियमों के विरुद्ध था।
वापसी नहीं, जांच शुरू
जब वे अगस्त 2014 में ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे, तो मामला गंभीर हो गया। परिवार से भी संपर्क नहीं हो पा रहा था।
सेना मुख्यालय ने दूतावासों के जरिए स्पेन और नॉर्वे में खोजबीन करवाई। पासपोर्ट विवरण भी साझा किए गए। लेकिन कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।
बेंगलुरु स्थित पैरा रेजिमेंटल सेंटर में कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई गई। कई महीनों की जांच के बाद, अक्टूबर 2014 में उन्हें आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया गया।
संभावित कारण: हादसा या स्वेच्छा से गायब होना?
मामले को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आईं:
- बेस जंपिंग हादसा
यह संभावना सबसे अधिक मानी गई कि किसी जोखिमपूर्ण जंप के दौरान दुर्घटना हुई हो। - स्वेच्छा से लापता होना
कुछ चर्चाओं में यह भी कहा गया कि वे करियर से असंतुष्ट थे और जानबूझकर गायब हो गए। - अन्य साजिशी सिद्धांत
सोशल मीडिया और फोरम पर अलग-अलग तरह की अटकलें लगीं, लेकिन किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
सेना की ओर से कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे मामला आज भी अनसुलझा है।
2026: सेवा समाप्ति की प्रक्रिया
करीब एक दशक तक कोई जानकारी न मिलने के बाद अब भारतीय सेना ने मेजर शर्यफ भोंसले की कमीशन सेवा औपचारिक रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह कदम सेना के नियमों के तहत उठाया जाता है, जब कोई अधिकारी लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है और उसका पता नहीं चल पाता।
निष्कर्ष
मेजर शर्यफ भोंसले का मामला भारतीय सेना के लिए सिर्फ अनुशासन का विषय नहीं, बल्कि एक रहस्य भी है। एक प्रशिक्षित स्पेशल फोर्स अधिकारी का इस तरह गायब हो जाना कई सवाल छोड़ जाता है।
क्या यह एक दुर्घटना थी?
क्या यह स्वेच्छा से लिया गया फैसला था?
या कहानी में कुछ और छिपा है?
अब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं।
