भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक, पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 15 अगस्त 1947 से लेकर 27 मई 1964 तक करीब 17 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया। विविध भाषाओं, संस्कृतियों और धर्मों वाले विशाल भारत को एकजुट रखना आसान नहीं था, लेकिन नेहरू ने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवादी सोच के माध्यम से मजबूत नींव रखी।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में एक संपन्न कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता मोतीलाल नेहरू प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता संग्राम के नेता थे।
नेहरू ने शुरुआती शिक्षा घर पर प्राप्त की। बाद में वे इंग्लैंड के हैरो स्कूल और फिर ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में पढ़े। लंदन के इनर टेम्पल से कानून की पढ़ाई पूरी कर वे भारत लौटे और पिता के साथ वकालत शुरू की।
1916 में उनका विवाह कमला कौल से हुआ। 1917 में उनकी एकमात्र संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म हुआ, जो आगे चलकर देश की प्रधानमंत्री बनीं।
राजनीतिक जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन
1917 में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी से नेहरू प्रभावित हुए और होम रूल आंदोलन से जुड़े।
1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता को अपना लक्ष्य बना लिया।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले असहयोग आंदोलन (1920-22) में भाग लेने के कारण उन्हें पहली बार जेल जाना पड़ा। अगले लगभग 25 वर्षों में वे करीब 9 वर्ष तक विभिन्न अवधियों में जेल में रहे।
1929 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को खुलकर समर्थन दिया।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी वे अग्रणी भूमिका में रहे और फिर से गिरफ्तार किए गए।
आज़ादी के बाद चुनौतियाँ
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने।
हालांकि स्वतंत्रता के साथ ही विभाजन की त्रासदी सामने आई। पाकिस्तान और भारत के गठन के बाद बड़े पैमाने पर विस्थापन और हिंसा हुई। कश्मीर को लेकर विवाद भी उसी समय शुरू हुआ।
इन कठिन परिस्थितियों में नेहरू ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया और संविधान के मूल्यों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीतियाँ और उपलब्धियाँ
नेहरू ने लोकतांत्रिक समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया।
1951 में पहला पंचवर्षीय योजना कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसमें कृषि और औद्योगिक विकास पर जोर था। उन्होंने उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित किया। आईआईटी जैसे संस्थानों की स्थापना इसी सोच का परिणाम थी।
उन्होंने महिलाओं को संपत्ति में अधिकार और तलाक का कानूनी अधिकार देने जैसे सामाजिक सुधार लागू किए। जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ भी कानून बनाए गए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई। पंचशील के सिद्धांतों के माध्यम से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर दिया।
चीन युद्ध और अंतिम समय
1962 में चीन के साथ युद्ध ने नेहरू की छवि और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित किया। इस युद्ध के बाद उन्हें गंभीर आघात लगा। जनवरी 1964 में उन्हें स्ट्रोक आया और 27 मई 1964 को उनका निधन हो गया।
उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी और बाद में उनके नाती राजीव गांधी भी देश के प्रधानमंत्री बने।
निष्कर्ष
जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नेता थे। लोकतंत्र, शिक्षा, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय नीति के क्षेत्र में उनके फैसलों ने भारत की दिशा तय की।
