अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच क्यों गिर रहे सोना-चांदी के दाम? जानिए पूरी वजह

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच क्यों गिर रहे सोना-चांदी के दाम जानिए पूरी वजह

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच क्यों गिर रहे सोना-चांदी के दाम? जानिए पूरी वजह

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी को हमेशा सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है। जब दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट या राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तब निवेशक आमतौर पर सोना और चांदी खरीदते हैं। इससे इनकी कीमतों में तेजी देखने को मिलती है।

लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। यह स्थिति निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को हैरान कर रही है। आम तौर पर ऐसे हालात में सोने की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं, लेकिन इस बार बाजार का रुख बिल्कुल अलग नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और निवेशकों की मुनाफावसूली जैसी कई वजहें हैं, जिनकी वजह से कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

युद्ध के बावजूद क्यों गिरा सोना

फरवरी के अंत में जब अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 5,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी। आम उम्मीद थी कि जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ेगा, सोने की कीमतों में तेजी आएगी।

लेकिन इसके उलट 9 मार्च तक सोने की कीमत गिरकर लगभग 5,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। यानी करीब 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

भारतीय बाजार में भी यही ट्रेंड देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी के अंत में सोने की कीमत लगभग 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थी, जो बाद में घटकर लगभग 1.60 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई।

यह गिरावट इस बात का संकेत है कि फिलहाल बाजार की दिशा केवल भू-राजनीतिक घटनाओं से तय नहीं हो रही, बल्कि कई अन्य आर्थिक कारक भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

चांदी की कीमतों में और बड़ी गिरावट

सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। फरवरी के अंत में एमसीएक्स पर चांदी लगभग 2.89 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी।

लेकिन मार्च के पहले सप्ताह तक इसकी कीमत गिरकर लगभग 2.63 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी सिर्फ एक हफ्ते के भीतर करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

आमतौर पर चांदी की कीमतें सोने के साथ ही बढ़ती या घटती हैं। लेकिन इस बार गिरावट की रफ्तार ज्यादा तेज रही है। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि चांदी का उपयोग औद्योगिक उत्पादन में भी होता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण उद्योगों की मांग में कमी आने से चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा है।

मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारण

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है।

जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है, इसलिए ऐसी स्थिति में डॉलर की मांग बढ़ जाती है।

डॉलर मजबूत होने का सीधा असर सोना और चांदी जैसी धातुओं पर पड़ता है। चूंकि इनकी कीमतें भी डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर इनकी कीमतों पर दबाव पड़ता है।

यही कारण है कि मौजूदा समय में युद्ध जैसे हालात होने के बावजूद सोने और चांदी में पारंपरिक तेजी देखने को नहीं मिल रही है।

निवेशकों की मुनाफावसूली से बढ़ा दबाव

सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह निवेशकों की मुनाफावसूली भी है।

पिछले कुछ महीनों में इन दोनों धातुओं में काफी तेजी देखने को मिली थी। कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी कर रखी थी। जब युद्ध की खबरों के बाद कीमतों में थोड़ी बढ़त हुई, तो कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर दी।

इससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतों में गिरावट देखने को मिली। कुछ निवेशक बाजार में नकदी जुटाने के लिए भी सोना और चांदी बेच रहे हैं।

बॉन्ड और डॉलर में बढ़ रहा निवेश

वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें अभी भी अपेक्षाकृत ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में निवेशक सोने के बजाय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और डॉलर आधारित निवेश विकल्पों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

बॉन्ड निवेशकों को नियमित ब्याज देता है, जबकि सोना केवल कीमत बढ़ने पर ही फायदा देता है। यही वजह है कि कई बड़े निवेशक अपने पोर्टफोलियो को बॉन्ड और डॉलर आधारित एसेट्स की ओर शिफ्ट कर रहे हैं।

इसके अलावा ऊर्जा कंपनियों और रक्षा कंपनियों के शेयरों में भी निवेश बढ़ रहा है, क्योंकि युद्ध के समय इन क्षेत्रों में लाभ की संभावना अधिक होती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से क्यों अलग है मौजूदा स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से काफी अलग है। उस समय डॉलर और बॉन्ड यील्ड इतनी मजबूत नहीं थीं, इसलिए निवेशकों ने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा था।

लेकिन आज वैश्विक वित्तीय बाजार अधिक विविध और तरल हो चुके हैं। निवेशकों के पास कई विकल्प मौजूद हैं, जैसे ऊर्जा से जुड़े एसेट, टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर और रक्षा उद्योग के शेयर।

इसी कारण युद्ध जैसी स्थिति होने के बावजूद सोने और चांदी में पारंपरिक तेजी देखने को नहीं मिल रही है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत

सोना और चांदी की कीमतों में यह गिरावट निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह बताता है कि आधुनिक वित्तीय बाजार पहले की तुलना में काफी जटिल और बहुआयामी हो चुके हैं।

निवेशकों को अब केवल भू-राजनीतिक घटनाओं के आधार पर निवेश निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि उन्हें ब्याज दरों, डॉलर की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और बाजार के रुझानों को भी ध्यान में रखना चाहिए।


निष्कर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट यह दिखाती है कि वैश्विक बाजार अब पहले से ज्यादा जटिल हो चुके हैं। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और निवेशकों की मुनाफावसूली जैसे कारक इस समय बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।

हालांकि लंबे समय में सोना अभी भी सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को अधिक सतर्क और रणनीतिक तरीके से निवेश करना होगा।

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FAQs: सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट से जुड़े सवाल

1. अमेरिका–ईरान तनाव के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोना और चांदी की कीमतें बढ़ जाती हैं, क्योंकि इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण इनकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

2. मजबूत डॉलर का सोने और चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ता है?
सोना और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती हैं। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग कम हो जाती है और कीमतों में गिरावट आ सकती है।

3. क्या निवेशकों की मुनाफावसूली भी कीमतों में गिरावट का कारण है?
हाँ, पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी की कीमतों में काफी तेजी आई थी। कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी। जब कीमतें थोड़ी बढ़ीं, तो उन्होंने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में गिरावट देखने को मिली।

4. क्या ब्याज दरें बढ़ने से सोने की मांग कम हो जाती है?
जी हाँ, जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो निवेशक बॉन्ड और फिक्स्ड इनकम जैसे विकल्पों में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि सोना नियमित आय नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के समय इसकी मांग कम हो सकती है।

5. चांदी की कीमतों में सोने से ज्यादा गिरावट क्यों आई है?
चांदी का उपयोग केवल निवेश के लिए ही नहीं बल्कि औद्योगिक उत्पादन में भी होता है। जब वैश्विक आर्थिक गतिविधियां धीमी होती हैं तो उद्योगों की मांग कम हो जाती है, जिससे चांदी की कीमतों पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

6. क्या भविष्य में सोने और चांदी की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है या डॉलर कमजोर होता है, तो सोना और चांदी फिर से मजबूत हो सकते हैं। लंबे समय में इन्हें अभी भी सुरक्षित निवेश माना जाता है।

7. क्या अभी सोना खरीदना निवेश के लिए सही समय है?
यह निवेशक की रणनीति और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमतों में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना लंबी अवधि के लिए फायदेमंद हो सकता है।

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