Tangail Airdrop History:- टंगाइल एयरड्रॉप (Tangail Airdrop) 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का वह निर्णायक मोड़ था, जिसने ढाका के रास्ते को सीधा खोल दिया और पाकिस्तानी सेना की 93 ब्रिगेड को नेस्तनाबूद कर दिया। 11 दिसंबर 1971 को भारतीय पैरा कमांडो (2 PARA) की 750 से अधिक सैनिकों को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के टंगाइल क्षेत्र में ड्रॉप किया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा एयरबोर्न ऑपरेशन था। इसने न सिर्फ युद्ध का अंत तेज किया, बल्कि पाक जनरल नियाजी को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने में बड़ी भूमिका निभाई।
1971 युद्ध का बैकग्राउंड: पूर्वी मोर्चे पर संकट
3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, लेकिन पूर्वी मोर्चे पर भारतीय सेना ने तेजी से प्रगति की। लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में 101 कम्युनिकेशन जोन ने जमालपुर, मायमेनसिंह और ब्राह्मणबरिया में पाकिस्तानी ताकतों को पीछे धकेल दिया। पाक की 93 इन्फैंट्री ब्रिगेड (कर्नल सज्जाद की कमान में) उत्तरी इलाकों से ढाका की ओर पीछे हट रही थी, ताकि राजधानी का बचाव कर सके।
समस्या यह थी कि जमालपुर-टंगाइल रोड पर पूंगली ब्रिज (Poongli Bridge) और लोहागंज नदी पर फेरी क्रॉसिंग पाकिस्तानियों के लिए आखिरी बड़ा रास्ता था। यदि भारतीय सेना ने इसे कब्जा नहीं किया, तो पाक ब्रिगेड ढाका पहुँचकर 40-45 दिन और लड़ाई लड़ी जा सकती थी। लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह ने फैसला लिया: एयरबोर्न अटैक से ब्रिज कब्जा कर पाकिस्तानियों को काट दो।
ऑपरेशन की योजना: गुप्त तैयारी और रिस्क
टंगाइल एयरड्रॉप युद्ध के बीच नहीं, बल्कि हफ्तों पहले प्लान किया गया था। नवंबर 1971 में कैप्टन पीके घोष (भारतीय आर्मी) दुश्मन लाइनों में घुसकर मुक्ति बाहिनी कमांडर कादर सिद्दीकी से मिले और ड्रॉप जोन (DZ) चिह्नित किया।
- मुख्य उद्देश्य: पूंगली ब्रिज और फेरी साइट कब्जा कर पाक 93 ब्रिगेड को ढाका पहुँचने से रोकना। फिर 1 मराठा लाइट इन्फैंट्री (LI) से लिंक-अप कर ढाका पर मार्च।
- फोर्स: 2 PARA बैटालियन (कमांडिंग ऑफिसर: लेफ्टिनेंट कर्नल कुलवंत सिंह पन्नू), 750+ पैरा कमांडो, आर्टिलरी बैटरी, इंजीनियर डिटैचमेंट, एयर डिफेंस और मेडिकल टीम।
- एयर सपोर्ट: IAF की 50 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (An-12, C-119 Packet, Caribou, Dakota), ग्नाट और मिग-21 फाइटर्स एस्कॉर्ट में।
- रिस्क: दुश्मन इलाके में ड्रॉप, हवाई हमले का खतरा, और ग्राउंड पर पाक ब्रिगेड। लेकिन IAF की हवाई वर्चस्व ने इसे संभव बनाया।
प्लान: पाथफाइंडर पहले डमी ड्रॉप (16 किमी दूर) करेंगे, फिर असली ड्रॉप।
11 दिसंबर 1971: ड्रॉप का दिन– चमत्कारिक सफलता
दोपहर 4 बजे पश्चिम बंगाल के कालाईकुंडा और डुम डुम एयरबेस से 46 IAF प्लेन उड़ान भरी। दोपहर 4:30 बजे टंगाइल के ऊपर 700+ पैरा कमांडो ड्रॉप हो गए – पूंगली ब्रिज से पूर्व की तरफ खेतों में।
ड्रॉप की चुनौतियाँ और रीग्रुपिंग
- ड्रॉप वाइड एरिया में फैला, लेकिन पैरा कमांडो ने तेजी से रीग्रुप किया।
- पाकिस्तानी दो प्लाटून और रजाकारों ने हल्का विरोध किया, लेकिन पैरा ने फेरी साइट पहले कब्जा ली।
- शाम 7 बजे तक पूंगली ब्रिज पर हमला: ‘D’ कंपनी फ्लैंक्स कवर कर रही थी, बाकी बैटालियन ने ब्रिज और फेरी पर कब्जा कर लिया। कोई भारतीय हताहत नहीं।
पाक काउंटर–अटैक और लड़ाई
पाक 93 ब्रिगेड ने रात में ब्रिज पर बटालियन-साइज अटैक किया, लेकिन 2 PARA ने खदेड़ दिया।
- पाकिस्तानियों के 143 सैनिक मारे गए, 2 ऑफिसर और 29 कैद।
- भारतीय पक्ष: सिर्फ 3 हताहत।
- रात भर डक-आउट लड़ाई, सुबह तक ब्रिज सिक्योर।
लिंक– अप और ढाका मार्च: युद्ध का अंत
शाम को ही 1 मराठा LI ने टंगाइल रोड तोड़कर ब्रिज पर पहुँच लिंक-अप किया। अब भारतीय सेना के पास टongi-ढाका रोड की बजाय मनिकगंज-ढाका रोड खुल गया – सीधा रास्ता! 95 और 167 माउंटेन ब्रिगेड ने बिना रुकावट ढाका की ओर बढ़े।
- प्रभाव: पाक 93 ब्रिगेड खत्म। नियाजी ने कहा, “टंगाइल फोटो देखकर सरेंडर किया।”
- 16 दिसंबर: ढाका में 93,000 पाक सैनिकों का आत्मसमर्पण।
रिपब्लिक डे 2024 में IAF ने इसे री-एनैक्ट किया।
प्रमुख नायक और सम्मान
| नाम | भूमिका | सम्मान |
| लेफ्टिनेंट कर्नल केएस पन्नू | 2 PARA CO, लीडरशिप | महावीर चक्र (MVC) |
| कैप्टन पीके घोष | DZ स्काउटिंग | – |
| कादर सिद्दीकी | मुक्ति बाहिनी सपोर्ट | – |
| लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह | पूर्वी कमांड प्लानर | – |
2 PARA को “पूंगली ब्रिज” बैटल ऑनर और “ढाका” थिएटर ऑनर मिला।

सैन्य महत्व: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा
- स्केल: 750+ पैरा ड्रॉप – WWII बाद सबसे बड़ा।
- जॉइंट ऑपरेशन: आर्मी-IAF परफेक्ट कोऑर्डिनेशन।
- स्ट्रैटेजिक: ब्रिज कब्जे से पाक रिट्रीट कट, ढाका 5 दिन में गिरा।
- साइकोलॉजिकल: लंदन टाइम्स में फोटो ने पाकिस्तानियों में डर फैलाया।
राम मोहन राव की अगरा एक्सरसाइज फोटो को टंगाइल की बताकर प्रोपगैंडा किया गया।
विरासत: आज की सीखें
टंगाइल एयरड्रॉप भारतीय सैन्य इतिहास का गौरव है – साहस, सटीकता और जॉइंटमैनशिप का प्रतीक। यह साबित करता है कि साहसिक फैसले युद्ध बदल सकते हैं। आज PARA SF के ट्रेनिंग में इसका केस स्टडी पढ़ाया जाता है।
यह ऑपरेशन बांग्लादेश लिबरेशन और भारत की सैन्य श्रेष्ठता का प्रतीक है। 16 दिसंबर को विजय दिवस पर इसे याद किया जाता है।
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